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प्रस्तावना


वन पारिस्थितिकी तंत्र


छत्तीसगढ़ के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 44 प्रतिशत जंगलों के अंतर्गत है, जो कि अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियों जैसे कि अच्छी वर्षा और तुलनात्मक रूप से कम जैविक हस्तक्षेप की वजह से जैव विविधता में बहुत समृद्ध है। राज्य के वन क्षेत्र तीनों वितानों के साथ घने वनों से आच्छादित है। प्रजातियों की संरचना के आधार पर वन पारिस्थितिक तंत्र को मोटे तौर पर तीन प्रकार के वर्गीकरण में वर्गीकृत किया जा सकता है।


क्रमांक
वन के प्रकार
क्षेत्रफल (वर्ग.कि.)
भौगौलिक क्षेत्र का %
जैवविविधता स्थिति
1.
मिश्रित वन
34230
25.32
बहुत समृद्ध
2.
साल वन
19682
14.56
समृद्ध
3.
सागोन वन
5858
4.33
बहुत समृद्ध
  कुल
59772
44.21
 


छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज व्यापार की मात्रा


क्रं.
एम.एफ.पी की श्रेणी
प्रजाति
अनुमानित व्यापार
1.
विनिर्दिष्ट

तेंदू पत्ता (Diospyros melanoxylon roxp), कुल्लू गोंद (Stercalia urens) (Anogeissus latifolia), खैर (Acacia catichu), बबूल (Acacia nilotica)

720
2.
गैर-विनिर्दिष्ट

साल बीज (Shorea robust), हर्रा (Terminalia chebula), बहेडा (Terminalia belerica), इमली (Tamarindus indica), महुआ (Madhuca latifolia), लाख (Karria lacca), कोसा (Erythroxylum coca) , माहुल पत्ता (Bauhinia vahalii), चिरौंजी (Buchanania lanzan), बायबिडंग (Enbelia tsjerium cotiam), वन जीरा (Vernonia anthelmintica), कालमेघ (Andrographis paniculata), आंवला (Phyllanthus emblica) etc.

780
योग
1500

उपरोक्त वनोपज का उपयोग ग्रामीण समुदायों द्वारा दवा, भोजन की खुराक के रूप किया जाता है और इसके अलावा, ग्रामीण समुदायों को इन उपजों के संग्रहण और बिक्री के माध्यम से विशेष रूप से गैर-कृषि सत्र के दौरान पर्याप्त आय अर्जित करते हैं। वर्तमान में, विनिर्दिष्ट एमएफपी का व्यापार छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित द्वारा तेन्दू पत्ता संग्रहणकर्ताओं के त्रि-स्तरीय निकायों के माध्यम से संगठित और नियंत्रित किया जाता है। गैर-विनिर्दिष्ट लघु वनोपज (एमएफपी) / औषधीय पौधों के असंगठित व्यापार ने संग्रहणकर्ताओं के लिए कम संग्रहण कीमत और वन क्षेत्रों से एमएफपी की अनिश्चित/असतत् कटाई के लिए प्रेरित किया है। इसके अलावा प्रसंस्करण और औद्योगिक इकाइयां मुख्य रूप से राज्य के बाहर स्थित हैं।


छत्तीसगढ़ सरकार ने प्राकृतिक रूप में पौधे संसाधन को संरक्षित करने के उद्देश्य से राज्य को "हर्बल राज्य" घोषित किया है। वन के अन्दर और बाहर औषधीय पौधों की खेती, गैर विनाशकारी कटाई, संगठित व्यापार और लघु वनोपज आधारित उद्योगों को लघु वनोपज के प्रसंस्करण के लिए बढ़ावा देने ताकि राज्य में अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा हो सके, ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार हो सके और स्वास्थ्य कवर प्रदान करना हर्बल राज्य के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए लघु वनोपज संघ द्वारा उठाए जाने वाली मुख्य गतिविधियां हैं।