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संसाधन सर्वेक्षण एवं इथनोबाॅटनिकल सर्वेक्षण


यूरोपीयन कमीशन द्वारा पोषित ‘‘अकाष्ठीय वनोपज आधारित रोजगारन्मुखी कार्य परियोजना’’ अंतर्गत राज्य के सभी जिला यूनियनों में कुल 2582 एवं 2789 सेम्पल प्लाट की स्थापना क्रमशः वर्ष 2007 एवं 2008 में किया जाकर संसाधन सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण में कुल 486 प्रजातियों की जानकारियों का संकलन किया गया, जिसमें 123 वृक्ष, 62 झाड़ी, 01 पाम, 58 बेलाएं, 212 शाकीय, 07 फर्न एवं 23 घास सम्मिलित है। सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर ‘‘छत्तीसगढ़ राज्य के वानस्पतिक प्रजातियों का संसाधन सर्वेक्षण प्रतिवेदन’’ पुस्तिका का प्रकाशन कर वितरण किया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा यूरोपियन कमीशन परियोजना अंतर्गत राज्य में औषधीय पौधों की उपलब्धता के आधार पर चयनित 21 जिला यूनियनों में इथनोबाॅटनिकल सर्वेक्षण कराया गया। उक्त सर्वेक्षण में 418 वैद्यों से साक्षात्कार में प्राप्त वनौषधियों से चिकित्सा में प्रयुक्त 3399 परम्परागत औषधियों का अभिलेखन किया गया। वैद्यों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर ‘‘एक दृष्टि में छ.ग राज्य की परम्परागत चिकित्सा पद्धति’’ नाम से पुस्तिका का प्रकाशन किया गया है। उक्त सर्वेक्षण अंतर्गत हर्बल हेल्थ केयर को बढ़ावा देने के लिए राज्य में वनौषधालय हेतु स्थल का चयन कर वनौषधालय स्थापना की कार्यवाही की गई है। चयनित स्थानों में वनौषधालय भवन का निर्माण तथा स्थानीय वैद्य का चयन कर वनौषधालय संचालन हेतु वैद्य को नियुक्त किया गया। वैद्य द्वारा पारंपरिक चिकित्सा कार्य किया जाता है तथा उन्हें निर्धारित मानदेय राशि प्रदान की जाती है। राज्य में 48 वनौषधालयों का संचालन किया जा रहा है जिसमें कार्यरत् वैद्यों को राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र रायपुर तथा आयुष विभाग के सहयोग से प्रशिक्षण प्रदाय किया गया है।
वैद्य सुमेर सिंह - वनौषधालय केंवची वनौषधालय केंवची

 

वनौषधि प्रसंस्करण केन्द्र

यूरोपियन कमीशन परियोजना अंतर्गत राज्य में स्व सहायता समूह पर आधारित 06 वनौषधि निर्माण केन्द्रों की स्थापना की गई है। राज्य में डोंगानाला (जिला यूनियन कटघोरा), पनचक्की (जिला यूनियन जशपुर), केंवची (जिला यूनियन मरवाही), केशोडार (जिला यूनियन गरियाबंद), नारायणपुर (जिला यूनियन नारायणपुर) तथा कुरंदी (जिला यूनियन जगदलपुर) में उक्त केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। उपरोक्त केन्द्रों में कुल 90 आयुर्वेदिक औषधियों का ड्रग लाईसेंस प्राप्त कर निर्माण की कार्यवाही संचालित की जा रही है। केन्द्रों से निर्मित औषधियों का विपणन एन.डब्लू.एफ.पी मार्ट एवं संजीवनियों के माध्यम से किया जाता है। केन्द्रों में कार्यरत् समूह के सदस्यों को आयुष विभाग द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन तथा समय-समय पर प्रशिक्षण प्रदाय किया जाता है। इन इकाईयों से जुड़े समूहों को अतिरिक्त रोजगार की प्राप्ति हुई है।
वनौषधि प्रसंस्करण केन्द्र डोंगानाला वनौषधि प्रसंस्करण केन्द्र डोंगानाला- पैकेजिंग

 

शहद संग्रहण एवं शहद प्रसंस्करण

छत्तीसगढ़ राज्य की वन क्षेत्रों से उत्तम गुणवत्ता का शहद बहुतायत में प्राप्त होता है। शहद संग्राहकों को उचित मूल्य दिलाने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा कच्चे शहद का दर निर्धारित किया गया है जो कि वर्तमान में 150 रू. प्रति किलो ग्राम है। बाजार दर के अनुसार समय समय पर कच्चे शहद के क्रय दर में संशोधन किया जाता है जिससे संग्राहकों को उचित लाभ प्राप्त होता है। शहद संग्रहण केन्द्र अंतर्गत जिला यूनियन कटघोरा, मरवाही, राजनांदगांव एवं धरमजयगढ़ में शहद संग्रहण माइक्रोइंटरप्राईजेस की स्थापना की गई। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा शहद संग्राहकों का विनाशविहीन विदोहन पद्यति से शहद संग्रहण एवं गुणवत्ता नियंत्रण विषय पर CSV Wardha (Centre of Science for Villages) के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण कराया गया है तथा शहद संग्रहण में उपयोगी टूल कीट का वितरण किया गया है।

 

राज्य में उक्त संग्रहित शहद का प्रसंस्करण एवं बाॅटलिंग जिला यूनियन बिलासपुर, जशपुर नगर, कवर्धा तथा पूर्व भानुप्रतापपुर में स्थापित शहद प्रसंस्करण केन्द्रों द्वारा किया जाता है, जिसे छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड नाम से संजीवनी / एन.डब्ल्यू.एफ.पी.मार्ट विक्रय केन्द्रों से विक्रित किया जाता है। उक्त शहद की बाजार मांग काफी अधिक है।
शहद संग्रहण शहद संग्राहकों का प्रशिक्षण - जशपुर
शहद प्रसंस्करण केन्द्र कानन पेन्डारी बिलासपुर शहद प्रसंस्करण केन्द्र पनचक्की, जशपुर

 

वनौषधालय की सूची