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स्व-सहायता समूह


.: स्व-सहायता समूह

 

महिला स्व-सहायता समूह का जन्म बांग्लादेश में हुआ एवं श्री मोहम्मद यूनूस, स्व-सहायता समूह के जनक है। स्व-सहायता समूह आर्थिक स्वालम्बन और सामाजिक हालत में सुधार के लिये एकत्र हुए लोगों का एक स्वैच्छिक संगठन है जिसका मुख्य उद्देश्य छोटी-छोटी बचतों के माध्यम से पूंजी निर्माण, सदस्यों को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराना, स्व-रोजगार को बढ़ावा देना। समूह आपसी विश्वास और सहयोग के आधार पर काम करने वाला एक अनौपचारिक संगठन है। स्व-सहायता समूह को किसी विधान के तहत पंजीकृत होने की आवश्यकता नहीं है। समूह किसी ग्राम, मोहल्ले, टोले के समान आर्थिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि वाले 10 से 20 व्यक्तियों का दल होना चाहिए। समूह में समानता के सिद्धान्त का पालन करते हुए निर्णय सर्वसम्मति से लिये जाते हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले एवं गरीबी रेखा से उपर जीवन यापन करने वाले परिवार के सदस्यों का जहाॅं तक सम्भव हो पृथक-पृथक समूह बनाया जाता है।

स्व-सहायता समूह के गठन में सदस्यों का चुनाव निम्नानुसार किया जा सकता है -


  • केवल महिलाओं का समूह
  • केवल पुरूषों का समूह
  • मिश्रित समूह

समूह के सदस्यों की निमित बैठक होनी चाहिए प्रत्येक माह में कम से कम एक बार एवं समूह द्वारा किये जा रहे कार्य अथवा गतिविधियों का आंकलन करने के लिये ग्रेडिंग किया जाना चाहिए, यह ग्रेडिंग मुख्यतः पंचायत ग्रामीण विकास विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा किया जाता है लेकिन कोई भी विभाग अथवा एजेन्सी अपनी आवश्यकता के अनुसार ग्रेडिंग कर सकता है।


स्व-सहायता समूहों के जीविकोपाज्रन हेतु छत्तीसगढ़ में छ.ग. राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किये जा रहे कार्यः

छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपज आधारित रोजगारोन्मुखी कार्यों को बढ़ावा देने के लिये संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2006-07 से यूरोपियन कमीशन राज्य साझेदारी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा था। यह परियोजना दिसम्बर 2016 में समाप्त हो गयी है। परियोजना बंद होने के फलस्वरूप इसके अंतर्गत कराये गये कार्यों से जुड़े हितग्राहियों को परियोजना से प्राप्त होने वाले लाभ की निरंतरता बनाये रखना अति आवश्यक है।


यूरोपियन कमीशन परियोजना से संचालित कार्यों की सतत्ता तथा हितग्राहियों को लाभ दिलाने के उद्देश्य से संघ द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपज आधारित रोजगारोन्मुखी कार्य नाम से 07 वर्षीय (2017-18 से 2023-24 तक) परियोजना स्वीकृत की गयी है। परियोजना की कुल लागत रू. 29.50 करोड़ है। यह राशि संघ को प्राप्त ब्याज की राशि से प्रदाय किया जाना है।


क्र.
घटक का नाम
प्रावधानित राशि
(रू. लाख में)
1.

अकाष्ठीय वनोपज आधारित जीविकोपार्जन कार्य

155.00
2.

भण्डारण

95.00
3.

विपणन

185.00
4.

अनुसंधान एवं विस्तार

135.00
5.

हर्बल हेल्थ केयर को बढ़ावा

260.00
6.

लघु वनोपज संरक्षण

60.00
7.

सूचना प्रबंधन प्रणाली

50.00
8.

मानव संसाधन प्रबंधन एवं क्षमता विकास

2010.00
  योग 2950.00

  • स्व-सहायता समूह की सूची


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